सुभाष चंद्र यादव की रिपोर्ट
म्योरपुर। म्योरपुर मे रामलीला मंचन के सातवे दिन का लीला नक कटईया व सीता हरण का लीला खेला गया
आयोजन समिति ने म्योरपुर थानाध्यक्ष जितेन्द्र सरोज एव अवर अभियंता महेश कुमार को अंग वस्त्र एवं मोमेंटो भेंट क़र सम्मानित किया अपने संबोधन में थाना अध्यक्ष ने कहा कि इस क्षेत्र की सबसे अच्छी लीला म्योरपुर में खेली जाती है महिलाओं को जागरुक करते हुए कहा लीला देख क़र घर जाने के दौरान अगर कोई भी अराजक तत्व आपको परेशान करता है तो तुरंत 112 नंबर डायल करें या थाने में आकर सूचना दें तुरंत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी लीला का शुरुवात पंचवटी में प्रभु श्री राम माता सीता छोटे भाई लखन जी के साथ कुटिया बनाकर निवास करते हैं राक्षसी सुर्फनखा जंगल में विचरण करने के दौरान दो शुकुमार देख मोहित हो जाति है श्रीराम से विवाह करने को कहती है प्रभु कहते है मेरी पत्नी मेरे साथ है तुम लक्ष्मण से पूछ लो लक्ष्मण जी कहते हैं मैं श्री राम का दास हूं मैं तुमसे विवाह नहीं कर सकता दोनों भाइयों को रिझाने के लिए सुंदर रूप धारण कर सूर्पनखा द्वारा बहुत ही मनमोहक अंदाज में नृत्य प्रस्तुत किया जाता है इसी दौरान लक्ष्मण ने शूर्पणखा के नाक और कान दोनों काट दिए कटी नाक लेकर सूर्पनखा खर दुषण दरबार जाती है कटी कान का बदला लेने पंचवटी खर, दूषण जाते हैं और श्री राम से युद्ध में वीरगति को प्राप्त होते हैं इसके बाद सुर्फनखा रावण दरबार जाती है रावण से आपबीती बताती है शूर्पणखा के काटी नाक कान देख रावण आँख बबूला होता है शुर्फनखा से कहता है तुम. खर,दूषण के पास नहीं गयी शुर्फनखा कहती है दोनों के पास गयी थी तपसीओ ने दोनों को मौत के घाट उतार दिया खर, दूषण के मौत कि खबर सुनते ही महा ज्ञानी रावण समझ जाता हैँ रामा अवतार हो गया शुर्फनखा का कटी नाक, कान का बदला लेने के लिए रावण मामा मरीछ के पास जा जाता हैं और कहता हैँ तुम सोने का मृग वन जाना और पंचवटी से दूर दोनों तपसी को ले क़र चले जाना मामा मरीछ रावण कि बात मान पंचवटी कुटिया के आसपास सोने का मृग बन विचरण करता हैँ जिसे देख सीता जी प्रभु श्री राम से कहती है आप जाइए मृग को मार कर ले आइये वन गमन का एक निशानी रहेगा प्रभु श्री राम छोटे भाई को कुटिया का रक्षा करने के लिए कह कर मृग को पकड़ने जाते हैं इसी दौरान जब काफ़ी देर तक नहीं आते हैं तो ,माता सीता लक्ष्मण जी को श्री राम. का पता लगाने के लिए भेजती हैं लक्ष्मण जी लक्ष्मण
रेखा खींच कहते है इस लक्ष्मण रेखा को जो भी पार करेगा वह जलकर भस्म हो जाएगा माता आप इस रेखा को पार मत करिएगा पंचवटी मे रावण साधु का भेस बदल क़र आता हैँ माता से भिक्षा मांगता है माता लक्ष्मण रेखा के अंदर से ही भिक्षा देती है जैसे ही रावण भिक्षा लेने के लिए बढ़ता है अपने आप आग जलने लगती है रावण कहता है बंदी भिक्षा नहीं लेगा जोगी तुम बाहर आकर
भिक्षा दो जैसे ही सीता माता बाहर आकर भिक्षा देती है रावण पकड़ के पुष्पक विमान से लंका ले जाने लगता है माता सीता का हरण होता देख जटायु रावण से युद्ध करता है रावण जटायु का दोनों पंख काट देता हैं उधर सुग्रीव अपने सेना के साथ जंगल में रहते हैं सीता माता अपना कुण्डल फेंक देती है भगवान का सजीव दर्शन क़र लीला प्रेमी भाव विभोर हो जाते है
इस दौरान पर श्री रामलीला कमेटी के महा प्रबंधक सुनील कुमार सिंह,अध्यक्ष मोनू जायसवाल,श्री रामलीला मंडली अध्यक्ष शनि अग्रहरी,अजय कुमार,पंकज सिंह,अंकित अग्रहरी,मनदीप रौनियर,रामू,ब्यास आशीष अग्रहरी (बिट्टू), सुजीत अग्रहरी, संदीप अग्रहरी,नमन प्रकाश अग्रहरी, रंजन अग्रहरी,नीरज अग्रहरी, अवनीश कुमार ,और सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

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