निलंबन तक सीमित रहेगी कार्रवाई या तय होगी जवाबदेही?90 फीसदी झुलसी महिला ICU में,पड़ोसियों का लाखों का नुकसान
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| रिपोर्ट:देवेन्द्र पाण्डेय |
वाराणसी। सारनाथ के पंचकोशी मार्ग स्थित पैगंबरपुर में गुरुवार शाम अवैध पटाखा निर्माण के दौरान हुए भीषण विस्फोट ने कई परिवारों की जिंदगी बिखेर दी। करीब 450 वर्गफीट में बने राजू खान के दो मंजिला मकान का अगला हिस्सा धमाके में ढह गया। हादसे में राजू की पत्नी चांदनी (39), बेटा आदिल (16) और बेटी अरबिया (10) घायल हो गए। चांदनी करीब 90 फीसदी तक झुलस गई हैं और उन्हें ICU में रखा गया है।वहीं, राजू खान और उसकी मां मुन्नी के मौके से फरार होने की बात सामने आई है।
धमाके से दहशत,पड़ोसियों के घर भी तबाह
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मकान में राजू खान अपनी मां के साथ पटाखे बनाता और रखता था। पड़ोस में रहने वाली सोनी ने बताया कि शाम करीब पांच बजे वह अपने घर में स्थापित मां दुर्गा के कलश का अखंड दीप देखने पहुंची थीं। इसी दौरान तेज धमाका हुआ और सामने का मकान ढह गया। उनके घर की खिड़कियों के शीशे टूटकर बिखर गए, जिससे उन्हें और एक बच्चे को चोट आई। सोनी के मुताबिक, उन्होंने लोन लेकर मकान बनवाया था, जिसकी किस्तें अभी चुकानी हैं। हादसे में उनका घर क्षतिग्रस्त हो गया और पूजा का कलश भी टूट गया।
राजू के पड़ोसी अनिल का आरोप है कि धमाके का मलबा उनकी छत पर गिरा, जिससे एल्युमिनियम के काम का काफी सामान टूट गया। परिवार घर में मौजूद था, लेकिन सभी सुरक्षित बच गए। अब उनके सामने रोजी-रोटी और नुकसान की भरपाई का संकट है।
शिकायतें होती रहीं,कार्रवाई पर सवाल
सोनी का दावा है कि मोहल्ले के लोग वर्षों से पटाखा निर्माण से परेशान थे और कई बार शिकायत भी कर चुके थे। उन्होंने बताया कि मुन्नी पहले सरैया इलाके में भी पटाखे बनाती थी, जहां हुए विस्फोट में उसके पति की मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, राजू भी पहले जेल जा चुका था और रिहाई के बाद दोबारा पटाखा निर्माण शुरू कर दिया गया।
निलंबन के बाद आगे क्या?
घटना के बाद पुलिस कमिश्नर ने संबंधित चौकी इंचार्ज और बीट प्रभारी आरक्षी को निलंबित कर जांच के आदेश दिए हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि रिहायशी इलाके में कथित अवैध पटाखा निर्माण लंबे समय तक कैसे चलता रहा? शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई? क्या केवल दो पुलिसकर्मियों का निलंबन पर्याप्त है या संबंधित स्तर पर पूरी जिम्मेदारी तय होगी?
धमाके ने सिर्फ एक मकान नहीं गिराया, बल्कि कई परिवारों की सुरक्षा और आजीविका पर चोट की है। अब जरूरत निष्पक्ष जांच, प्रभावित परिवारों के नुकसान के आकलन और दोषियों की जवाबदेही तय करने की है।




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