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गीडा के पार्कों के काम पर उठे सवाल, घटिया निर्माण सामग्री लगाने का आरोप

 


सेक्टर-23 आवासीय कॉलोनी में पार्कों के आसपास नाली ऊंची करने का चल रहा काम; स्थानीय लोगों ने तकनीकी जांच और सामग्री की लैब जांच की मांग की

 

दीपक शुक्ला

गोरखपुर 


सहजनवा गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) के सेक्टर-23 स्थित आवासीय कॉलोनी में पार्कों के रखरखाव और उनके आसपास जलनिकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए चल रहा निर्माण कार्य विवादों में घिर गया है। निर्माण कार्य में कथित तौर पर घटिया ईंट, सीमेंट और गिट्टी के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए स्थानीय निवासियों ने गीडा प्रशासन से पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव की समस्या को दूर करने और पार्कों के आसपास पानी की निकासी बेहतर बनाने के उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से काम कराया जा रहा है। लेकिन यदि निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया तो इसका सीधा असर कार्य की गुणवत्ता और टिकाऊपन पर पड़ेगा। लोगों ने निर्माणाधीन नालियों और अन्य कार्यों में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों से मौके पर निरीक्षण करने की मांग की है।



जलभराव से निजात के लिए कराया जा रहा निर्माण


सेक्टर-23 की आवासीय कॉलोनी में पार्कों के आसपास बरसात के दौरान पानी जमा होने की समस्या सामने आती रही है। इसी को देखते हुए गीडा की ओर से जलनिकासी व्यवस्था को बेहतर करने तथा पार्कों के आसपास की नालियों को ऊंचा करने का कार्य कराया जा रहा है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यदि नालियां पर्याप्त मजबूत और निर्धारित मानकों के अनुरूप बनीं तो जलभराव की समस्या से राहत मिल सकती है। लेकिन निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर जिस तरह के सवाल उठ रहे हैं, उससे लोगों में चिंता है कि कमजोर निर्माण पहली तेज बारिश या लगातार जलभराव के दबाव में क्षतिग्रस्त हो सकता है।



ईंट, सीमेंट और गिट्टी की गुणवत्ता पर सवाल


स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही ईंट, सीमेंट और गिट्टी की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह सार्वजनिक धन से कराया जा रहा है। लोगों ने मांग की है कि निर्माण पूरा होने से पहले ही मौके पर इस्तेमाल हो रही सामग्री के नमूने लिए जाएं और उनकी प्रयोगशाला में तकनीकी जांच कराई जाए। इससे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


सरकारी धन के इस्तेमाल पर उठे सवाल


निर्माण की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय निवासियों ने सरकारी धन के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि मानकों के अनुरूप निर्माण नहीं कराया गया और कुछ समय बाद नाली या अन्य निर्माण क्षतिग्रस्त हो गया तो उसकी दोबारा मरम्मत पर सरकारी धन खर्च करना पड़ सकता है।

निवासियों का कहना है कि किसी भी विकास कार्य का उद्देश्य तभी पूरा माना जाएगा, जब उससे लोगों को लंबे समय तक सुविधा मिले। यदि निर्माण के तुरंत बाद मरम्मत की जरूरत पड़ती है तो इससे न केवल सरकारी धन का दोबारा इस्तेमाल होगा, बल्कि लोगों को भी जलभराव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।


निर्माण पूरा होने से पहले हो औचक निरीक्षण


स्थानीय लोगों ने गीडा के उच्चाधिकारियों से निर्माण कार्य की नियमित निगरानी कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अधिकारियों को निर्माण पूरा होने का इंतजार करने के बजाय निर्माण के दौरान ही औचक निरीक्षण करना चाहिए।

लोगों के मुताबिक, यदि निर्माण के दौरान ही सामग्री की गुणवत्ता, नाली की मजबूती और निर्धारित तकनीकी मानकों की जांच होती रहे तो किसी भी कमी को समय रहते दूर कराया जा सकता है। इससे भविष्य में होने वाली मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च से भी बचा जा सकेगा।


जांच के बाद होगी कार्रवाई : अपर कार्यपालक अधिकारी


मामले में गीडा के अपर कार्यपालक अधिकारी रामप्रकाश ने बताया कि सेक्टर-23 में चल रहे निर्माण कार्य की शिकायत उनके संज्ञान में आई है। उन्होंने कहा कि मामले की गहनता से जांच कराई जाएगी और निर्माण कार्य की गुणवत्ता तथा इस्तेमाल की जा रही सामग्री के संबंध में आवश्यक परीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता खराब पाई जाती है या निर्धारित मानकों की अनदेखी की पुष्टि होती है तो संबंधित कार्यदायी संस्था और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी के इस आश्वासन के बाद अब स्थानीय लोगों की नजर जांच की प्रक्रिया और उसके परिणाम पर टिकी है। लोगों का कहना है कि जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि मौके पर निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और पूरे कार्य की तकनीकी जांच कराकर स्थिति स्पष्ट की जाए।


गुणवत्ता जांच से ही साफ होगी तस्वीर


सेक्टर-23 में चल रहे निर्माण कार्य को लेकर उठे सवालों के बीच अब सबसे महत्वपूर्ण बिंदु निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच और कार्य की गुणवत्ता का सत्यापन है। यदि जांच में सामग्री और निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया जाता है तो इससे लोगों की आशंकाएं दूर होंगी। वहीं, यदि किसी स्तर पर कमी मिलती है तो समय रहते उसे दुरुस्त कराकर सार्वजनिक धन और नागरिकों की सुविधा दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

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