संवाददाता अहमद रजा
पूर्वांचल के समग्र विकास के लिए पृथक राज्य गठन पर व्यापक बहस की जरूरत : पवन कुमार सिंह
सोनभद्र 24 सितम्बर 2026 पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों को मिलाकर पृथक पूर्वांचल राज्य के गठन की मांग को एक बार फिर प्रमुखता से उठाया है। संगठन ने कहा है कि पूर्वांचल की विशिष्ट भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक एवं प्रशासनिक परिस्थितियों को देखते हुए पृथक राज्य के गठन के मुद्दे पर व्यापक और तथ्यात्मक जनचर्चा की आवश्यकता है।
पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा का कहना है कि क्षेत्र में कृषि, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, औद्योगिक विकास, सड़क एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े अनेक मुद्दे लंबे समय से विकास की प्राथमिकताओं में बने हुए हैं। संगठन का मानना है कि छोटे प्रशासनिक क्षेत्र में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास की प्राथमिकताएं निर्धारित करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा के महासचिव पवन कुमार सिंह ने कहा कि, “पूर्वांचल राज्य की मांग किसी क्षेत्र या समाज के विरोध में नहीं है, बल्कि पूर्वांचल के विकास, प्रशासनिक सुविधा और क्षेत्रीय आवश्यकताओं पर केंद्रित मांग है। हमारा प्रयास है कि इस विषय पर तथ्यों के आधार पर व्यापक जनसंवाद हो और पूर्वांचल की जनता की आकांक्षाओं को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यम से सामने रखा जाए।”
उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के विकास से जुड़े आंकड़ों, उपलब्ध संसाधनों, रोजगार की संभावनाओं और प्रशासनिक आवश्यकताओं का विशेषज्ञों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ अध्ययन कराया जाना चाहिए, ताकि पृथक राज्य के प्रस्ताव पर गंभीर एवं सार्थक चर्चा हो सके।
राष्ट्रीय सचिव राजेश यादव ने कहा कि, “पूर्वांचल के लोगों की लंबे समय से चली आ रही क्षेत्रीय विकास संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अलग पूर्वांचल राज्य के गठन की मांग पर राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इस विषय पर लोकतांत्रिक तरीके से खुली बहस और जनसंवाद होना जरूरी है। हमारा संगठन शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से इस मांग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा ने कहा कि संगठन आने वाले समय में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में जनसंवाद, जागरूकता कार्यक्रम एवं विचार-विमर्श आयोजित करेगा।

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