ब्यूरो चीफ सच्चिदानन्द राय की रिपोर्ट
नाले के बाहर बिखरे फाइबर तार और अधूरे भवनों को लेकर ठेकेदार को लगाई फटकार, लोकार्पण की तैयारी तेज
555.56 करोड़ की लागत से 3.50 किलोमीटर में विकसित हो रहा विरासत गलियारा, पुराने शहर को आधुनिक स्वरूप देने की कवायद
गोरखपुर। शहर के पुराने और ऐतिहासिक क्षेत्र को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के लिए विकसित किए जा रहे महत्वाकांक्षी विरासत गलियारा का गुरुवार को मंडलायुक्त इन्द्र विक्रम सिंह ने स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने धर्मशाला बाजार से अलीनगर, घंटाघर होते हुए पांडेहाता तक विकसित किए जा रहे गलियारे में निर्माण कार्यों की प्रगति, सड़क, नाला, भवनों की स्थिति और सौंदर्यीकरण के कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान कई स्थानों पर कार्य अधूरे मिलने और निर्माण के बाद भी अंतिम रूप नहीं दिए जाने पर मंडलायुक्त ने संबंधित कार्यदायी संस्था के अधिकारियों और ठेकेदार को फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि शेष सभी कार्यों को जल्द से जल्द गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराया जाए, जिससे परियोजना का लोकार्पण कराया जा सके।
धर्मशाला बाजार से पांडेहाता तक बनने वाले इस विरासत गलियारे की कुल लंबाई करीब 3.50 किलोमीटर है और परियोजना की अनुमानित कुल लागत 555.56 करोड़ रुपये है। इसका मार्ग धर्मशाला बाजार से अलीनगर और घंटाघर होते हुए पांडेहाता तक निर्धारित किया गया है। संशोधित डिजाइन के बाद सड़क की चौड़ाई को स्थानीय जरूरतों और सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए उपयोगी एवं व्यवस्थित बनाया गया है। परियोजना का उद्देश्य पुराने शहर को उसकी ऐतिहासिक पहचान के साथ आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना है।
निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने नाले के बाहर जगह-जगह पड़े फाइबर के तारों को


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