मुआवजे के मुद्दे पर नाराज़ ग्रामीणों ने निर्माण कार्य स्थल पर आक्रोश आन्दोलन किया
पालघर
जिले के बोईसर क्षेत्र के शिवगांव में मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। भूमि अधिग्रहण और मुआवज़े के मुद्दे पर नाराज़ ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर पहुँचकर कार्य रुकवा दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी कृषि भूमि, मकान और अन्य संपत्तियों का अधिग्रहण तो कर लिया गया, लेकिन अब तक पूर्ण और उचित मुआवज़ा नहीं दिया गया है। उनका कहना है कि समुचित भुगतान किए बिना ही परियोजना का कार्य प्रारंभ कर दिया गया, जिससे प्रभावित परिवारों में असंतोष व्याप्त है। ग्रामीणों के अनुसार सर्वे क्रमांक 464 सहित कई भूमि खंड इस परियोजना से प्रभावित हुए हैं, जिसके कारण अनेक परिवार आर्थिक रूप से दयनीय स्थिति में पहुँच गए हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि भूमि मूल्यांकन की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और नुकसान के अनुरूप मुआवज़ा नहीं दिया जा रहा है। इसी के विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीण, विशेषकर महिलाएँ, निर्माण स्थल पर पहुँचीं और तत्काल कार्य बंद कराने की मांग की। महिलाओं ने आगे आकर अपना आक्रोश व्यक्त किया और कार्य रोकने पर जोर दिया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन तत्काल घटनास्थल पर पहुँचा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस निरीक्षक, सहायक पुलिस निरीक्षक, मंडल अधिकारी तथा बुलेट ट्रेन परियोजना से जुड़े अधिकारी भी मौके पर पहुँचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से संवाद कर उन्हें शांत करने का प्रयास किया।
प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान हेतु जिला प्रशासन स्तर पर शीघ्र बैठक आयोजित की जाएगी और कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित निर्णय लिया जाएगा।
हालाँकि ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे केवल मौखिक आश्वासन पर भरोसा नहीं करेंगे। उनका कहना है कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं दिया जाएगा, तब तक किसी भी परिस्थिति में निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और अधिक व्यापक व उग्र रूप ले सकता है तथा उच्च स्तरीय अधिकारियों से भी शिकायत की जाएगी।
देश की महत्वपूर्ण मानी जाने वाली इस परियोजना के समक्ष स्थानीय असंतोष एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरकर सामने आया है। जहाँ एक ओर केंद्र सरकार परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित ग्रामीण अपने अधिकारों और उचित मुआवज़े की मांग पर अडिग हैं।
प्राप्त मीडिया प्रतिनिधि को मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल परियोजना स्थल पर स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है, किंतु ग्रामीण प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नज़र बनाए हुए हैं।

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