17 अक्तूबर से प्रदेशभर में संपूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी, आठ सूत्रीय मांगों को लेकर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
अरविन्द कुमार की रिपोर्ट
महराजगंज। वर्षों से लंबित मांगों पर शासन की अनदेखी से नाराज लेखपालों ने शनिवार को जिलास्तरीय तहसील दिवस का बहिष्कार कर सदर तहसील में धरना दिया। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष सूरज कुमार के नेतृत्व में लेखपालों ने मुख्यमंत्री को संबोधित आठ सूत्रीय मांगपत्र एसडीएम को सौंपा। मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर संघ ने 17 अक्तूबर से प्रदेशभर में संपूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी।
जिलाध्यक्ष सूरज कुमार ने कहा कि राजस्व प्रशासन में लेखपालों की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सेवा संबंधी समस्याओं और मूलभूत सुविधाओं की मांगें लंबे समय से लंबित हैं। उन्होंने 2800 ग्रेड पे लागू करने और वेतन विसंगति दूर करने की मांग उठाई। साथ ही आठ वर्ष से लंबित अंतर्मंडलीय तबादलों की प्रक्रिया शुरू करने और चयन वर्ष 2025-26 की लंबित पदोन्नति सूची जारी करने की मांग की।
संघ के महामंत्री ऋषिकेश शर्मा ने नवनियुक्त लेखपालों की विभागीय परीक्षा का परिणाम और प्रशिक्षण प्रमाणपत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने स्टेशनरी भत्ता 100 से बढ़ाकर 500 रुपये, वाहन भत्ता 1500 रुपये और विशेष भत्ता 100 से बढ़ाकर 1000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग रखी।
लेखपालों ने भूलेख कार्यालयों और विभिन्न पटलों पर संबद्ध लेखपालों को तत्काल मूल तैनाती पर भेजने, ग्राम सचिवालयों में आवश्यक संसाधन और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने तथा लेखपाल पद को तकनीकी पद घोषित कर लैपटॉप व मोबाइल उपलब्ध कराने की भी मांग की।
लेखपालों ने कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को निर्णायक चरण में ले जाया जाएगा। धरने में अशोक त्रिपाठी, कृष्णमोहन यादव, सुशील शुक्ला, सुनील यादव, मारुतिनंदन निगम, अनिल मिश्रा, दीपक मणि पांडेय, आशुतोष मिश्रा, एनुल हक, अविनाश साहनी, शोभनाथ भारती, अभिषेक पटेल, ऋषभ दूबे, विनोद कन्नौजिया, अर्णव प्रताप सिंह, चंद्रप्रकाश, मंजेश पटेल, आशुतोष पटेल, मनोज चौहान, गणेश यादव आदि मौजूद रहे।

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