ब्यूरो चीफ सच्चिदानन्द राय की रिपोर्ट
गोरखपुर
गुटबाजी और निजी स्वार्थ से समाज को नुकसान पहुंचाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं : गंगा सिंह सैंथवार
गोरखपुर। सैंथवार मल्ल महासभा ने समाज के आरक्षण को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम और अलग-अलग गुट बनाकर समाज में विवाद पैदा करने की कोशिशों पर कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गंगा सिंह सैंथवार ने कहा कि वर्तमान में समाज को जिस आरक्षण का लाभ मिल रहा है, उसमें किसी भी प्रकार के बदलाव के महासभा पक्ष में नहीं है। उन्होंने समाज के लोगों से भ्रमित होने के बजाय एकजुट रहने की अपील की।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि सैंथवार मल्ल समाज के आरक्षण का इतिहास पुराना है। वर्ष 1989 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल में सैंथवार मल्ल नाम से आरक्षण का प्रावधान किया गया था। इसके बाद आरक्षण के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने के कारण सरकार को अपनी अधिसूचना वापस लेनी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि इसके बाद समाज की ओर से आरक्षण की लड़ाई लगातार जारी रही।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1994 में स्वर्गीय राजेश सिंह, देवरिया द्वारा उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के समक्ष सैंथवार मल्ल के मूल नाम से आरक्षण के लिए प्रत्यावेदन प्रस्तुत किया गया। महासभा का आरोप है कि इसी दौरान समाज के कुछ लोगों ने आरक्षण के विरोध में यह तर्क देते हुए प्रत्यावेदन दिया कि सैंथवार मल्ल क्षत्रिय हैं। महासभा के अनुसार, आयोग के स्तर पर समाज के विभिन्न पक्षों पर विचार के बाद यह स्पष्ट किया गया कि सैंथवार मल्ल समाज के जिन लोगों को कुर्मी की उपजाति के रूप में माना जाता है, उन्हें आरक्षण का लाभ

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