ब्यूरो चीफ सच्चिदानन्द राय की रिपोर्ट
गोरखपुर
गोरखपुर। यह सिर्फ एक सड़क हादसे की कहानी नहीं, बल्कि उस बेबसी की दास्तान है, जिसमें एक पिता अपनी 11 वर्षीय बेटी की जिंदगी बचाने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा चुका है। 2 अगस्त को खजनी थाना क्षेत्र के उनवल गांव में शरीयत अली की 11 वर्षीय बेटी आबिदा सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गई। परिजन उसे जिला अस्पताल गोरखपुर लेकर पहुंचे, जहां से बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। मेडिकल कॉलेज में करीब एक दिन इलाज के बाद बच्ची को गोरखपुर के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। तब से मासूम का इलाज चल रहा है।
बेटी की जिंदगी बचाने के लिए शरीयत अली अब तक दो लाख रुपये से अधिक खर्च कर चुके हैं। जमा पूंजी खत्म हो गई और रिश्तेदारों व परिचितों ने भी अब कर्ज देने से हाथ खड़े कर दिए। हालात यह हैं कि परिवार के पास खाने तक के पैसे नहीं हैं और शरीयत अली के मुताबिक दो दिन से उन्होंने खाना नहीं खाया है। एक तरफ अस्पताल का बढ़ता बिल है, दूसरी तरफ अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी के लिए संघर्ष करती मासूम बेटी।सबसे बड़ा सवाल सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी है। शरीयत अली के पास सरकार द्वारा जारी आयुष्मान कार्ड है, लेकिन उनका आरोप है कि ट्रांसपोर्ट नगर स्थित निजी अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि उनके अस्पताल में इस योजना का लाभ नहीं मिलता। ऐसे में सवाल उठता है कि पात्र गरीब परिवारों को आयुष्मान योजना का लाभ दिलाने और योजना से जुड़े अस्पतालों की निगरानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
हादसे के मामले में भी परिवार को पुलिस कार्रवाई

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