सरकारी पुलिस चौकी के पहचान बोर्ड के साथ लगा विज्ञापन चर्चा में,अनुमति को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी
वाराणसी। शहर के थाना लालपुर-पांडेयपुर क्षेत्र स्थित पांडेयपुर पुलिस चौकी का एक बोर्ड इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। सामने आई तस्वीर में चौकी के नाम वाले बोर्ड पर पुलिस की पहचान के साथ एक निजी इंस्टीट्यूट का प्रचार भी दिखाई दे रहा है। इसके अलावा बोर्ड के बगल में अलग से एक बैनर भी लगा नजर आ रहा है। ऐसे में सरकारी पुलिस चौकी की पहचान के साथ निजी संस्थान का प्रचार किए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
पुलिस चौकी के बोर्ड पर विज्ञापन क्यों?
आमतौर पर पुलिस चौकी का बोर्ड संबंधित पुलिस इकाई की पहचान कराने और आम नागरिकों को सही स्थान तक पहुंचने में मदद करने के लिए लगाया जाता है। ऐसे में यदि इसी बोर्ड पर किसी निजी संस्थान का प्रचार भी शामिल हो, तो यह चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है। सवाल यह है कि चौकी के पहचान बोर्ड पर निजी इंस्टीट्यूट का प्रचार किस आधार पर लगाया गया है और क्या इसके लिए संबंधित विभाग से अनुमति ली गई है?
जिम्मेदार अधिकारी स्पष्ट करें स्थिति
मामले में थाना लालपुर-पांडेयपुर और चौकी स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए कि बोर्ड पर निजी संस्थान का प्रचार लगाने की अनुमति दी गई है या नहीं। यदि अनुमति दी गई है, तो इसके पीछे क्या व्यवस्था और उद्देश्य है? वहीं, यदि बिना अनुमति के ऐसा किया गया है, तो इस संबंध में क्या कदम उठाए जाएंगे?
सरकारी पहचान और निजी प्रचार के बीच सवाल
पुलिस चौकी जैसे सरकारी परिसर में निजी प्रचार की व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि सरकारी संसाधनों और पहचान के इस्तेमाल को लेकर किसी तरह का भ्रम न रहे। पांडेयपुर चौकी की सामने आई तस्वीर के बाद अब संबंधित पुलिस अधिकारियों से स्पष्टीकरण की अपेक्षा की जा रही है।
फिलहाल,इस मामले में अनुमति से संबंधित दस्तावेज या जिम्मेदार अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में वास्तविक स्थिति अधिकारियों के जवाब और उपलब्ध अभिलेखों की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


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