रिपोर्ट: देवेन्द्र पाण्डेय
वाराणसी। स्नातक एमएलसी चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल करने वाले रंजीत कुमार यादव (माधव) का पर्चा खारिज होने के बाद विवाद गहरा गया है। नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में रंजीत यादव समर्थकों के साथ अनशन और धरने पर बैठे हैं। सोमवार को उनके धरने का पांचवां दिन रहा। उन्होंने नामांकन खारिज किए जाने को प्रशासनिक लापरवाही और साजिश का परिणाम बताते हुए सत्ता के दबाव में कार्रवाई किए जाने का आरोप लगाया है। मीडिया से बातचीत में रंजीत यादव ने दावा किया कि उन्होंने नामांकन के दौरान सभी आवश्यक और वैध दस्तावेज जमा किए थे। उनका आरोप है कि निर्वाचन प्रक्रिया के तहत शपथ दिलाने और उसकी वीडियोग्राफी कराने की जिम्मेदारी संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर की थी, लेकिन उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई और उनके अधिवक्ता को भी अंदर प्रवेश नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने भीड़ का हवाला देते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया और उनका नामांकन निरस्त कर दिया। प्रत्याशी के मुताबिक, सात तारीख को नामांकन खारिज होने के बाद करीब 12 से 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक निरस्तीकरण की आधिकारिक लिखित रिपोर्ट नहीं मिली है। उन्होंने दावा किया कि अन्य प्रत्याशियों को ऐसी रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध करा दी गई थी। इस मामले में रिटर्निंग ऑफिसर, चुनाव प्रेक्षक, जिलाधिकारी, चुनाव आयोग, गृह मंत्रालय, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय को प्रत्यावेदन भेजने की बात भी कही। बीएचयू से पीएचडी कर रहे और किसान परिवार से आने वाले रंजीत यादव ने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों की मेहनत के बाद उन्हें जनसमर्थन मिल रहा था, जिससे राजनीतिक दलों के समीकरण प्रभावित हो रहे थे। इसी कारण उनका पर्चा साजिश के तहत खारिज कराया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रंजीत यादव ने बताया कि उन्होंने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय मिलने और चुनाव लड़ने के अधिकार को लेकर समाधान होने तक उनका शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा।



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