थप्पड़ कांड के बाद जिला-महानगर कार्यकारिणी भंग, नई कमान को लेकर बढ़ी हलचल; यादव, निषाद और ब्राह्मण चेहरों के नामों पर चर्चाओं का दौर
सच्चिदानंद राय
गोरखपुर।
समाजवादी पार्टी के गोरखपुर संगठन में हुए थप्पड़ कांड के बाद अब संगठन के पुनर्गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रेस क्लब में पार्टी की प्रेसवार्ता के दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष राम नगीना साहनी को थप्पड़ मारे जाने की घटना के बाद सपा नेतृत्व ने गोरखपुर की जिला और महानगर कार्यकारिणी समेत संबंधित संगठनात्मक इकाइयों को भंग कर दिया। इसके बाद नई कार्यकारिणी के गठन और खासकर जिलाध्यक्ष पद को लेकर पार्टी के भीतर दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है।
पार्टी के इस फैसले के बाद गोरखपुर से लेकर लखनऊ तक संगठन की नई तस्वीर को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पार्टी के कई पुराने और सक्रिय नेताओं ने शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए संपर्क और पैरवी शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक पार्टी नेतृत्व की ओर से जिलाध्यक्ष या महानगर अध्यक्ष पद के लिए किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
जिलाध्यक्ष पद को लेकर सबसे ज्यादा हलचल
गोरखपुर में सबसे अधिक चर्चा जिलाध्यक्ष पद को लेकर है। निवर्तमान जिलाध्यक्ष ब्रजेश कुमार गौतम लंबे समय तक संगठन की कमान संभालते रहे। अब नई कार्यकारिणी के गठन के साथ यह सवाल प्रमुख हो गया है कि पार्टी जिला संगठन की जिम्मेदारी किस चेहरे को सौंपती है। सपा के अंदर चल रही चर्चाओं के मुताबिक, इस बार जिले में सामाजिक और संगठनात्मक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पिछड़े वर्ग से किसी नेता को जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना पर विचार हो सकता है। इसी के बाद यादव नेताओं की सक्रियता बढ़ने की चर्चा है। हालांकि, यह अभी पार्टी का आधिकारिक निर्णय नहीं है। संभावित नामों को लेकर सोशल मीडिया और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। अंतिम फैसला सपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को ही करना है।
यादव चेहरों की दावेदारी चर्चा में
जिलाध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों में पूर्व जिलाध्यक्ष अवधेश यादव, चंद्रबली यादव और प्रह्लाद यादव के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं। इसके अलावा संतोष यादव के नाम को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चाएं होने की बात सामने आ रही है। इनमें कुछ नेता पहले संगठन की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और पार्टी के पुराने संगठनात्मक ढांचे से जुड़े रहे हैं। ऐसे में नई कार्यकारिणी के गठन के दौरान उनके अनुभव और संगठन में सक्रियता को भी चर्चा का विषय बताया जा रहा है। हालांकि, किसी भी नाम को लेकर पार्टी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लिहाजा फिलहाल इन नामों को संभावित दावेदारों की चर्चा के तौर पर ही देखा जा रहा है।
नगीना प्रसाद साहनी का नाम भी फिर चर्चा में
थप्पड़ कांड के बाद पूर्व जिलाध्यक्ष राम नगीना प्रसाद साहनी का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। प्रेस क्लब की घटना में उनके साथ मारपीट और थप्पड़ मारे जाने का मामला सामने आया था। घटना के बाद पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक स्तर पर व्यापक कार्रवाई की। नगीना साहनी पूर्व में गोरखपुर सपा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। उनके नाम को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा होने की बात कही जा रही है। कुछ नेताओं का मानना है कि निषाद समाज से आने वाले चेहरे को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने से पार्टी के सामाजिक आधार को साधने का संदेश जा सकता है। हालांकि, यह केवल पार्टी के अंदर चल रही चर्चाओं और राजनीतिक आकलनों का हिस्सा है। उनकी संभावित दावेदारी को लेकर भी सपा नेतृत्व की ओर से अभी कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
महानगर अध्यक्ष पद पर भी नजर
जिले के साथ-साथ महानगर संगठन में भी नए अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पार्टी ने महानगर इकाई को भी भंग कर दिया है, ऐसे में शहर में संगठन की कमान किसे मिलेगी, इसको लेकर भी नेताओं की सक्रियता बढ़ी है। पार्टी के भीतर महानगर संगठन के लिए सामाजिक संतुलन और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर चेहरा तय किए जाने की चर्चा है। इसी क्रम में ब्राह्मण समेत विभिन्न सामाजिक वर्गों से जुड़े नेताओं के नाम कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा में आने की बात कही जा रही है। लेकिन यहां भी अभी किसी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है।
लखनऊ तक पहुंच रही दावेदारों की आवाज
कार्यकारिणी भंग होने के बाद गोरखपुर में संगठनात्मक पदों के लिए दावेदारों की भागदौड़ तेज हो गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात के साथ ही राष्ट्रीय नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिशें शुरू होने की चर्चा है। दावेदार अपने-अपने संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्र में सक्रियता और सामाजिक समीकरणों को आधार बनाकर जिम्मेदारी के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि नई टीम में ऐसे चेहरों को जगह दी जा सकती है जो संगठन को चुनावी स्तर पर सक्रिय करने में भूमिका निभा सकें।
थप्पड़ कांड से शुरू हुआ संगठन में बड़ा फेरबदल
गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में सपा की प्रेसवार्ता के दौरान बैठने की जगह को लेकर विवाद हुआ था। देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया और पूर्व जिलाध्यक्ष राम नगीना साहनी को थप्पड़ मारे जाने की घटना सामने आई। घटना के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और कई सपा नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज हुई। घटना के बाद सपा नेतृत्व ने कार्रवाई करते हुए अंशुमान सिंह को पार्टी से निष्कासित किया और इसके बाद गोरखपुर की जिला-महानगर कार्यकारिणियों को भंग कर दिया। अब संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की जिम्मेदारी शीर्ष नेतृत्व के सामने है। ऐसे में जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर होने वाला फैसला आने वाले दिनों में गोरखपुर की सपा राजनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण संगठनात्मक घटनाक्रम माना जा रहा है।
कई पुराने चेहरों की निगाह संगठन पर
नई कार्यकारिणी के गठन की चर्चा के बीच पार्टी के कई पुराने पदाधिकारियों और सक्रिय नेताओं की निगाह संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर है। जिलाध्यक्ष पद के अलावा जिला कार्यकारिणी में प्रमुख पद, महानगर संगठन और फ्रंटल संगठनों में भी नए चेहरों को जगह मिलने की संभावना है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी नेतृत्व पुराने अनुभवी चेहरों पर भरोसा करता है या सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नई पीढ़ी के नेताओं को आगे बढ़ाता है। फिलहाल गोरखपुर सपा में संगठनात्मक बदलाव को लेकर भागदौड़, मुलाकातों और पैरवी का दौर तेज है। संभावित दावेदार अपने-अपने स्तर से सक्रिय हैं, जबकि पार्टी कार्यकर्ता शीर्ष नेतृत्व के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष के नाम सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सपा गोरखपुर में संगठन की नई कमान किन चेहरों को सौंपती है।

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