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जर्जर भवन की छत भरभराकर गिरी, खाद का बड़ा स्टॉक दबा

 



200 बोरी यूरिया, 48 बोरी पोटाश और 23 बोरी डीएपी के नुकसान की आशंका, समय रहते मरम्मत न कराने पर उठे सवाल



सहजनवा,

 गोरखपुर।

सहजनवा ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत भङसार में स्थित साधन सहकारी समिति के जर्जर भवन की छत बुधवार को अचानक भरभराकर गिर गई। छत के मलबे में समिति द्वारा किसानों के बीच वितरण के लिए लाकर रखा गया खाद का बड़ा स्टॉक दब गया। इसमें करीब 200 बोरी यूरिया, 48 बोरी पोटाश और 23 बोरी डीएपी शामिल बताया जा रहा है। मलबे में खाद दबने से भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि साधन सहकारी समिति का भवन लंबे समय से जर्जर अवस्था में था। भवन की छत और अन्य हिस्सों की हालत पहले से ही खराब थी। इसके बावजूद समय रहते भवन की मरम्मत अथवा वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। लगातार हो रही बारिश के बीच भवन की छत अचानक कमजोर होकर गिर गई।


खाद वितरण के समय हादसा होता तो हो सकता था बड़ा हादसा


छत गिरने के समय समिति पर खाद का वितरण नहीं हो रहा था। इस वजह से वहां किसानों और समिति के कर्मचारियों की मौजूदगी नहीं थी और एक बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि खाद वितरण के दौरान छत गिरती तो वहां मौजूद किसानों और कर्मचारियों के मलबे की चपेट में आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। ग्रामीणों ने जर्जर भवन को लेकर पहले से ही चिंता जताई थी। उनका कहना है कि जब भवन की स्थिति इतनी खराब थी तो खाद का स्टॉक वहां रखने के बजाय किसी सुरक्षित स्थान पर रखा जाना चाहिए था।


जर्जर भवन में रखा गया था खाद का स्टॉक


समिति के सचिव द्वारा वर्तमान समय में किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए 200 बोरी यूरिया, 48 बोरी पोटाश और 23 बोरी डीएपी भवन में रखा गया था। छत गिरने के बाद खाद का अधिकांश स्टॉक मलबे के नीचे दब गया। बारिश के कारण मलबा गीला होने से उसे हटाने में भी परेशानी हो रही है।

मलबे के नीचे दबे खाद के बोरे पानी के संपर्क में आने से खराब होने की आशंका भी जताई जा रही है। ऐसे में यदि समय रहते मलबा नहीं हटाया गया तो नुकसान और बढ़ सकता है।


जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल


घटना के बाद ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि जब समिति का भवन लंबे समय से जर्जर था तो उसकी मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण के लिए समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए। ग्रामीणों का कहना है कि खाद जैसे महत्वपूर्ण कृषि इनपुट को जर्जर भवन में रखने से पहले सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। मामले में एडीओ सहकारिता रामकेस ने कहा कि समिति भवन की छत पूरी तरह जर्जर थी और वह मरम्मत करने लायक स्थिति में नहीं थी। उन्होंने कहा कि खाद को जर्जर भवन के बजाय बगल के सुरक्षित कमरे में रखवाया जाना चाहिए था। अब घटना के बाद विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे में दबे खाद के स्टॉक को सुरक्षित निकालने और वास्तविक नुकसान का आकलन करने की है। साथ ही जर्जर भवनों में सरकारी खाद और अन्य सामग्री रखने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

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