रिपोर्ट: देवेन्द्र पाण्डेय
वाराणसी।कानून व्यवस्था के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती एक सनसनीखेज वारदात शिवपुर थाना क्षेत्र से सामने आई है। गिलट बाजार स्थित संत अतुलानंद स्कूल के पास बने शिव मंदिर में हरितालिका तीज (14 सितंबर 2026) के पावन अवसर पर पूजा करने आईं दो महिलाओं के लाखों रुपये के सोने के आभूषण चोरों ने साफ कर दिए। मगर इस आपराधिक घटना से भी ज्यादा चौंकाने वाला रवैया स्थानीय पुलिस का रहा है—एक पीड़िता को FIR के लिए चार दिन तक पुलिस थाने के चक्कर काटने पड़े, तो दूसरी महिला आज भी न्याय की आस में एफआईआर का इंतजार कर रही है!
पहली शिकायत पर 4 दिन की 'सुस्ती', फिर देर रात जागा प्रशासन
14 सितंबर की शाम मंदिर में पूजा के दौरान अर्चना सिंह के गले से करीब 40 ग्राम सोने का मंगलसूत्र (अनुमानित कीमत लगभग ₹6 लाख) गायब हो गया। घटना के तुरंत बाद उनके पति अमितेश सिंह ने थाने में लिखित प्रार्थना पत्र दिया। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि पुलिस ने चार दिन तक इस पर चुप्पी साधे रखी और 18 सितंबर की देर रात 11:06 बजे जाकर मुकदमा दर्ज किया। सवाल उठता है कि जब वारदात का दिन और समय स्पष्ट था, तो एफआईआर दर्ज करने में चार दिन का यह ‘अवांछित विलंब’ किस खातिर किया गया?
दूसरी पीड़िता अब भी एफआईआर के इंतजार में
हद तो तब हो गई जब इसी मंदिर से उसी शाम रंजू सिंह (पत्नी उमापति सिंह) का भी 15 ग्राम सोने का चेन लॉकेट सहित चोरी हो गया। उन्होंने भी तत्काल लिखित तहरीर दी, पर उनकी शिकायत पर अब तक मुकदमा दर्ज तक नहीं हो सका है। एक ही स्थान, एक ही दिन और एक जैसी दो वारदातें—फिर कार्रवाई में यह दोहरा मापदंड क्यों?
सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की नीयत पर तीखे सवाल
हरितालिका तीज जैसे प्रमुख पर्व पर मंदिर परिसर में कोई सुरक्षा या निगरानी व्यवस्था क्यों नहीं थी?
साक्ष्यों से खिलवाड़: चोरी जैसे मामलों में शुरुआत के 24 घंटे सबसे अहम होते हैं। चार दिन बाद एफआईआर दर्ज करने के दौरान क्या सीसीटीवी फुटेज और संदिग्धों के सुराग धुंधले नहीं पड़ गए होंगे?
प्रशासनिक लापरवाही: क्या शिवपुर पुलिस अपराध दर कागजों पर कम दिखाने के लिए शिकायतों को दबाने की नीति अपना रही है?
पीड़ितों को अब कागजी दिलासा नहीं, बल्कि ठोस जवाब चाहिए। क्या शिवपुर पुलिस आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजकर चोरी हुए गहने बरामद कर पाएगी, या यह मामला भी फाइलों की धूल चाटता रह जाएगा?

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