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सहजनवां बीआरसी में 43 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को मिला समावेशी शिक्षा का प्रशिक्षण

 



विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शुरुआती पहचान और समय पर हस्तक्षेप के बताए तरीके, प्रशिक्षण के बाद वितरित किए गए प्रमाण-पत्र


दीपक शुक्ला की रिपोर्ट 


गोरखपुर

सहजनवां, गोरखपुर। बच्चों के सर्वांगीण विकास और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से बुधवार को ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी), सहजनवां में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला परियोजना कार्यालय, गोरखपुर के निर्देशन में किया गया। प्रशिक्षण में क्षेत्र की 43 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण के दौरान कार्यकत्रियों को समावेशी शिक्षा, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शुरुआती पहचान और उनके विकास से जुड़े संकेतों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि बच्चों में किसी भी प्रकार की विशेष आवश्यकता अथवा विकास संबंधी समस्या की समय रहते पहचान होने पर उन्हें आवश्यक सहायता और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सकता है।


दिव्यांगता के विभिन्न प्रकार और शुरुआती लक्षणों की दी जानकारी


प्रशिक्षण में बच्चों में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं के साथ उनके शुरुआती लक्षणों और व्यवहार में दिखाई देने वाले संकेतों पर चर्चा की गई। कार्यकत्रियों को बताया गया कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक, व्यवहारिक और सीखने से जुड़े विकास पर नियमित नजर रखना बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण के दौरान मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर भी जानकारी दी गई। कार्यकत्रियों को समझाया गया कि यदि किसी बच्चे में सामान्य विकास से अलग कोई लक्षण दिखाई देता है अथवा उसकी सीखने, बोलने, व्यवहार करने या अन्य गतिविधियों में विशेष कठिनाई नजर आती है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते संबंधित विशेषज्ञों तक जानकारी पहुंचाई जानी चाहिए।


समय पर पहचान से बच्चों को मिल सकती है बेहतर मदद


स्पेशल एजुकेटर अनूप कुमार पाठक और माधव प्रसाद ने प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को बच्चों की जरूरतों को समझने, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान करने तथा उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि शुरुआती स्तर पर बच्चों की जरूरतों की पहचान और समय पर हस्तक्षेप से उन्हें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां बच्चों के साथ शुरुआती स्तर पर लगातार संपर्क में रहती हैं, इसलिए उनकी भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।


शिक्षा के अधिकार अधिनियम पर भी हुई चर्चा


प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act) से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी चर्चा की गई। कार्यकत्रियों को समावेशी शिक्षा की अवधारणा समझाते हुए बताया गया कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को भी समान रूप से शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें विद्यालयी व्यवस्था से जोड़ना आवश्यक है। कार्यक्रम के समापन अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी यज्ञ नारायण वर्मा ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बच्चों के विकास की शुरुआती अवस्था में उनकी सक्रिय भूमिका काफी प्रभावी हो सकती है। उन्होंने प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी का उपयोग अपने-अपने क्षेत्रों में बच्चों की पहचान और उन्हें आवश्यक सहयोग दिलाने में करने पर जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षण में प्रतिभाग करने वाली सभी 43 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। प्रशिक्षण के माध्यम से कार्यकत्रियों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, उनकी जरूरतों को समझने और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आवश्यक व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई।

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