रिपोर्ट:ओम प्रकाश राय
लखनऊ ग्राम समदा जाने वाली मुख्य सड़क पर गांव के पास पहुंचते ही कूड़े का ढेर लगा हुआ है। मालूम यह पड़ता है कि जैसे गांव पहुंचने पर कूड़े के ढेर से आने वाले लोगों का स्वागत किया जाएगा। कूड़े के ढेर के कारण सड़क के किनारे नालिया कूड़े से भरी हुई है और महादेव प्रसाद, नीरज कुमार, अभिनेंद्र पांडे, मैकू धीरज ,जितेंद्र यादव आदि लोगों ने बताया कि गांव में किसी भी जगह पर खाद की घोड़े का स्थान चिन्हित नहीं किया गया है जबकि आजादी के इतने साल हो चुके हैं चकबंदी भी गांव में हो चुकी है लेकिन पुराने प्रधानों से लेकर के मौजूदा प्रधान तक किसी ने कूड़ा फेंकने का स्थान यानी खाद का घोड़ा निश्चित नहीं किया जिस कारण गांव से लोग अपने घरों से कूड़ा निकाल कर गांव के बाहर में रोड के किनारे फैक्ट्री जिससे काफी गंदगी भरमार हो रही है और कूड़े का ढेर बनता जा रहा है ग्रामीणों द्वारा समय-समय पर इस कुड़े के ढेर को नाले में गिरा दिया जाता है जिससे कूड़ा सड़कर किसी गंभीर बीमारियों को पनपने में मदद कर सकता है ग्रामीणों का यह भी कहना है कि गांव में मरे हुए जानवरों के फेंकने का कोई भी स्थान चिन्हित नहीं है यह गांव समाज की काफी सफलता है ग्रामीणों ने मांग किया है कि जल्द से जल्द अधिकारियों द्वारा इस गांव में कूड़े का स्थान निश्चित किया जाए व मरे हुए जानवरों का स्थान भी निश्चित किया जाए। उपरोक्त लोगों ने यह भी बताया कि गांव में कहीं पर कोई कब्रिस्तान नहीं है अगर गांव के नक्शे के ऊपर कब्रिस्तान का स्थान मरे हुए जानवरों का स्थान या कूड़ा डालने का स्थान होगा तो किसी भी ग्रामीण को पता नहीं है क्योंकि प्रधानों द्वारा आज तक उन स्थानों को चिन्हित नहीं किया गया है।

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