वाराणसी। रोहनिया थाना क्षेत्र के मूड़ादेव गांव में भूमि विवाद को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि न्यायालय द्वारा यथास्थिति बनाए रखने के स्पष्ट आदेश के बावजूद विवादित भूमि पर जबरन चकमार्ग का निर्माण कराया जा रहा है। मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने स्थानीय प्रशासन, पुलिस और चकबंदी विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं तथा निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
पीड़िता हीरावती देवी, पत्नी रामचंद्र, निवासी ग्राम मूड़ादेव, का कहना है कि उनके परिवार की भूमि वर्ष 2018 से न्यायालय में विचाराधीन है और उस पर स्थगन (स्टे) आदेश प्रभावी है। इसके बावजूद विपक्षी रमेश साहनी पर ग्राम प्रधान और कुछ राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से विवादित भूमि पर जबरन चकमार्ग निर्माण कराने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि लगभग ढाई बिस्वा भूमि को कब्जाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि न्यायालय ने स्पष्ट रूप से यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
पीड़ित परिवार के सदस्य शिवशंकर भारद्वाज ने बताया कि विरोध करने पर विवाद बढ़ गया। उनका आरोप है कि वर्ष 2024 में निर्माण कार्य रोकने के दौरान डायल-112 पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन पुलिस की मौजूदगी में भी अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना का वीडियो बना रहे युवक का मोबाइल छीनकर तोड़ दिया गया तथा बाद में दोबारा कुछ लोगों के साथ पहुंचकर मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई। इस संबंध में थाना रोहनिया में शिकायत देने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
पीड़ित पक्ष का यह भी कहना है कि न्यायालय ने चकबंदी अधिकारियों की पूर्व रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए तथ्यात्मक एवं वास्तविक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कथित रूप से पुरानी रिपोर्ट को ही आधार बनाकर कार्यवाही आगे बढ़ाई गई। परिवार का आरोप है कि इससे न्यायालय के आदेशों की भावना का उल्लंघन हुआ है।
पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन तथा संबंधित चकबंदी अधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।


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