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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय का 21वां दीक्षांत समारोह संपन्न


हिमांशु यादव की रिपोर्ट 

प्रयागराज -  उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज का 21वां दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं तथा शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के महत्व पर जोर दिया गया।


समारोह को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने प्रयागराज को ज्ञान, न्याय, आस्था, अध्यात्म और स्वतंत्रता सेनानियों की पावन धरा बताते हुए कहा कि यह शहर धार्मिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि 'प्रयागे प्रविष्टमात्रे पापम् नश्यति' की मान्यता इस पावन नगरी की महिमा को दर्शाती है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम से यह भूमि विश्वभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का नाम भारत रत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन के नाम पर होना विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने टंडन जी को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाला दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि ऐसे राष्ट्रनेता आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सोच रखते हैं।


योगेन्द्र उपाध्याय ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा कि हर सफलता के पीछे माता-पिता का त्याग, संघर्ष और गुरुजनों का मार्गदर्शन होता है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के "मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्यदेवो भव" के संदेश को याद करते हुए विद्यार्थियों से अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करने का आह्वान किया।


Abhishek कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नए जीवन में प्रवेश का अवसर है। शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार, संस्कारित और संवेदनशील नागरिक तैयार करना है जो समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को पूरा करने में युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी!


इस अवसर पर उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय राज्य का एकमात्र मुक्त विश्वविद्यालय है, जहां नौकरीपेशा लोग, महिलाएं, दिव्यांगजन और विभिन्न कारणों से नियमित शिक्षा प्राप्त न कर पाने वाले विद्यार्थी भी उच्च शिक्षा हासिल कर अपने सपनों को साकार कर रहे हैं।


उन्होंने कहा कि आज के युवा ऐसे दौर में डिग्री प्राप्त कर रहे हैं, जब देश में तकनीक, ज्ञान-विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की प्रतिभा और परिश्रम सबसे बड़ी ताकत साबित होगी। रजनी तिवारी ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की विशेष खुशी है कि इस दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल प्राप्त करने वालों में अधिकांश बेटियां हैं, जो महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण है।

राज्य मंत्री ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत एक शिक्षिका के रूप में की और आज भी शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, आंगनबाड़ी केंद्रों और विश्वविद्यालयों के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायक है।

दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया गया।

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