रिपोर्ट: देवेन्द्र पाण्डेय
वाराणसी।खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एकमात्र महिला प्रत्याशी के रूप में रीतिका दुबे ने नामांकन पत्र दाखिल कर शिक्षकों के अधिकारों और समस्याओं को सदन में मजबूती से उठाने का संकल्प जताया। मीडिया से बातचीत में रीतिका दुबे ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य वित्तविहीन, तदर्थ, एडेड, संस्कृत, मदरसा तथा सीबीएसई-आईसीएसई से जुड़े शिक्षकों की समस्याओं को सदन में प्रमुखता से उठाना है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव किसी राजनीतिक दल विशेष का नहीं, बल्कि शिक्षकों के संघर्ष और उनके अधिकारों का चुनाव है। उनकी प्राथमिकताओं में वित्तविहीन शिक्षकों के लिए समान कार्य का समान वेतन, मानदेय, सेवा नियमावली और सेवा सुरक्षा का मुद्दा शामिल है। इसके साथ ही शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था और समय से पदोन्नति की मांग को भी प्रमुखता से उठाने की बात कही। रीतिका दुबे ने महिला शिक्षिकाओं के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में महिला शिक्षिकाओं की बड़ी भागीदारी है, इसलिए उनके लिए विशेष अवकाश और आवश्यक सुविधाओं का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने बिहार की तर्ज पर महिला शिक्षिकाओं के लिए विशेष छुट्टियों की व्यवस्था की मांग की। राजनीतिक या अन्य किसी प्रकार के दबाव के सवाल पर रीतिका दुबे ने कहा कि महिला शक्ति को दबाया नहीं जा सकता और शिक्षकों व महिलाओं का समर्थन उनके साथ है। उन्होंने कहा कि किसी भी दबाव का उनके संघर्ष पर असर नहीं पड़ेगा। रीतिका दुबे ने बताया कि वह वर्ष 2015 से शिक्षक संगठन से जुड़कर शिक्षकों की समस्याओं और उनके अधिकारों के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मौजूदा समस्याओं को दूर कर उन्हें उनका हक दिलाना ही उनकी प्राथमिकता है।

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