रिपोर्ट:देवेन्द्र पाण्डेय
वाराणसी। मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे को लेकर बुधवार को डीएम पोर्टिको के बाहर अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन कर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शन में बनारस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद कुमार शुक्ला समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल रहे। हाथों में पोस्टर लेकर अधिवक्ताओं ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के दौरान देशभर में करीब 13.5 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर होने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उनका कहना था कि यदि पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटे हैं तो इसकी पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वर्तमान में 13.5 करोड़ नामों को लेकर राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।
अधिवक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में मताधिकार नागरिकों का महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार है। इसलिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
इस दौरान बनारस बार अध्यक्ष विनोद कुमार शुक्ला के साथ अधिवक्ताओं ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि मतदाता सूची से नाम हटने की शिकायतों का प्रत्येक स्तर पर सत्यापन कराया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के समर्थन की बात भी कही और कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा।
अधिवक्ताओं ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से भी सवाल किया कि यदि मतदाता सूची से बाहर किए गए लोग पात्र नागरिक हैं तो उनके नाम हटाने की प्रक्रिया और आधार को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।


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