रिपोर्ट: देवेन्द्र पाण्डेय
वाराणसी।गर्भवती महिला का आठ महीने तक इलाज,ऑपरेशन से प्रसव और महज दो दिन बाद अस्पताल से छुट्टी!लेकिन घर पहुंचते ही महिला की तबीयत बिगड़ने लगी और देखते ही देखते परिवार को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर लगाने पड़े।मामला संकठा नगर स्थित सौभाग्य अस्पताल का है,जहां पीड़ित पति ओम प्रकाश सिंह ने अपनी पत्नी के ऑपरेशन के दौरान गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही बरते जाने का आरोप लगाया है।पति के मुताबिक,उनकी गर्भवती पत्नी का करीब आठ महीने तक सौभाग्य अस्पताल में इलाज चला था।18 अगस्त को ऑपरेशन से प्रसव कराया गया और 20 अगस्त को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।आरोप है कि घर पहुंचने के बाद महिला को उल्टी समेत कई समस्याएं होने लगींऔर तबीयत लगातार बिगड़ने लगी। परेशान परिजन पहले महिला को साईं वरदान अस्पताल लेकर पहुंचे,लेकिन बाद में उन्हें हेरिटेज अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।यहां अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन की जांच के बाद डॉक्टरों ने महिला के पेट में अत्यधिक संक्रमण होने तथा पूर्व में हुए ऑपरेशन के दौरान कोई ‘फॉरेन बॉडी’ यानी बाहरी वस्तु छूट जाने की जानकारी दी।पति का दावा है कि इसके बाद महिला का दोबारा ऑपरेशन करना पड़ा और संबंधित वस्तु को बाहर निकाला गया।इस दौरान महिला को पांच यूनिट खून भी चढ़ाना पड़ा।प्रसव के बाद महिला को दोबारा ऑपरेशन और गंभीर उपचार से गुजरना पड़ा,जबकि परिवार अब भी उसकी सेहत को लेकर चिंतित है।ओम प्रकाश सिंह का कहना है कि उनकी पत्नी की हालत अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुई है।उन्होंने पूरे मामले को गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही बताते हुए थाना लालपुर-पांडेयपुर में प्रार्थना पत्र देकर संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
मामले ने अस्पतालों में ऑपरेशन के बाद मरीजों की निगरानी और डिस्चार्ज प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।यदि ऑपरेशन के दौरान वास्तव में कोई बाहरी वस्तु पेट में छूट गई थी,तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?क्या ऑपरेशन के बाद आवश्यक सावधानियां बरती गईं?क्या महिला को छुट्टी देने से पहले उसकी स्थिति का समुचित आकलन किया गया था?एक प्रसव के बाद महिला को दोबारा ऑपरेशन से गुजरना पड़ा और पांच यूनिट खून चढ़ाने की नौबत आई—ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।फिलहाल,ये आरोप पीड़ित पति की ओर से लगाए गए हैं।संबंधित अस्पताल और डॉक्टरों का पक्ष तथा जांच के आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है।अब देखना है कि पुलिस शिकायत पर क्या कार्रवाई करती है और कथित चिकित्सकीय लापरवाही की जांच कब तक पूरी होती है।


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